"..कुछ रिश्ते अर्थहीन होते हैं और कुछ के अर्थ इतने गूढ़ होते हैं कि उन्हें औसत समझ का व्यक्ति नहीं समझ सकता..!!"
अपने आपको बहुत ज़्यादा बुद्धिजीवी और आधुनिक समझने वाले, इंसानों की संकीर्ण मानसिकता कभी~कभी रिश्तों की तय सीमारेखा पर सोचने के लिए मज़बूर कर देती है.
अपने आपको बहुत ज़्यादा बुद्धिजीवी और आधुनिक समझने वाले, इंसानों की संकीर्ण मानसिकता कभी~कभी रिश्तों की तय सीमारेखा पर सोचने के लिए मज़बूर कर देती है.
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